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Anand Mishra

Action Classics Thriller

5  

Anand Mishra

Action Classics Thriller

सैंतीस मिनट

सैंतीस मिनट

5 mins
8

हिंद महासागर
वर्ष 2087

रात के 02:13 UTC पर भारतीय महासागरीय रक्षा नेटवर्क ने एक अज्ञात प्रक्षेपण दर्ज किया।

वस्तु समुद्र के बीच स्थित एक परिवर्तित मालवाहक मंच से छोड़ी गई थी।

उसकी गति असामान्य थी।

उसकी संरचना अस्पष्ट थी।

लेकिन उसके प्रक्षेप-पथ ने एक बात स्पष्ट कर दी—

यदि वह अपनी वर्तमान दिशा में बढ़ती रही, तो वह अरब सागर पार करके भारतीय भूभाग तक पहुँच सकती थी।

नियंत्रण केंद्र में चेतावनी बज उठी।

"रणनीतिक खतरा — संभावित प्रभाव समय: 37 मिनट।"

वज्र-9

हिंद महासागर में भारत का अंतिम स्थायी मानव-संचालित अवरोधन केंद्र था—

वज्र-9।

सैकड़ों किलोमीटर दूर समुद्र के बीच तैरता हुआ यह विशाल मंच रडार, मिसाइल-रोधी प्रणालियों, उपग्रह संचार और स्वायत्त रक्षा नेटवर्क से जुड़ा था।

इसका सिद्धांत सरल था—

देखो। पहचानो। और यदि आवश्यक हो, रोक दो।

इसका नेतृत्व कर रही थीं—

मेजर अदिति राव।

बाईस वर्षों की सैन्य सेवा।

तीन बड़े संकट।

असंख्य अभ्यास।

लेकिन पहली बार उन्हें ऐसा लक्ष्य मिला था जिसके बारे में कोई निश्चित नहीं था कि वह वास्तव में क्या था।

अदिति ने स्क्रीन की ओर देखा।

"कितनी वस्तुएँ?"

ऑपरेशन अधिकारी ने उत्तर दिया—

"पहली गणना में एक।"

कुछ सेकंड बाद स्क्रीन बदल गई।

"सुधार—बारह।"

अदिति ने भौंहें सिकोड़ लीं।

"बारह?"

"हाँ।"

"सभी समान प्रक्षेप-पथ पर?"

"नहीं।"

"तो फिर वे मिसाइलें नहीं हैं।"

कमरे में सन्नाटा छा गया।

तभी एक उच्च-स्तरीय आदेश आया।

राष्ट्रीय रणनीतिक रक्षा प्राधिकरण।

अदिति ने संदेश खोला।

"वज्र-9 की बाहरी अवरोधन प्रणाली तत्काल निष्क्रिय करें।"

उन्होंने संदेश दोबारा पढ़ा।

क्रिप्टोग्राफिक प्रमाणीकरण सही था।

अधिकृत हस्ताक्षर सही था।

जैविक सत्यापन भी सही था।

फिर भी आदेश असामान्य था।

अदिति ने मुख्यालय से संपर्क किया।

स्क्रीन पर एक वरिष्ठ अधिकारी दिखाई दिए।

"मेजर राव, आदेश स्पष्ट है।"

"सर, अज्ञात वस्तुएँ भारतीय वायुसीमा की ओर बढ़ रही हैं।"

"स्थिति नियंत्रण में है।"

"किसके नियंत्रण में?"

कुछ क्षण मौन रहा।

"आपको जितना जानना आवश्यक है, उतना बताया जाएगा।"

संचार समाप्त हो गया।

अदिति ने ऑपरेशन अधिकारी की ओर देखा।

"प्रणाली निष्क्रिय मत करना।"

अधिकारी घबरा गया।

"मैडम, यह सीधा आदेश उल्लंघन होगा।"

"जानती हूँ।"

"फिर?"

अदिति ने स्क्रीन की ओर देखा।

"पहले पता लगाएँ कि वास्तव में हमारी ओर क्या आ रहा है।"

कुछ ही मिनट बाद चार वस्तुओं ने अचानक दिशा बदल दी।

वे भारत की ओर नहीं जा रही थीं।

वे सीधे वज्र-9 की ओर आ रही थीं।

अदिति समझ गईं।

"वे हमें पहले हटाना चाहते हैं।"

पहला ड्रोन रक्षा कवच से टकराया।

पूरा प्लेटफ़ॉर्म काँप उठा।

दूसरा विस्फोट बाहरी ऊर्जा ग्रिड के पास हुआ।

रोशनी चली गई।

आपातकालीन ऊर्जा सक्रिय हुई।

फिर आंतरिक संचार प्रणाली पर संदेश आया—

"अनधिकृत प्रवेश। रखरखाव क्षेत्र में घुसपैठ।"

अदिति ने तुरंत मुख्य नियंत्रण कक्ष बंद कर दिया।

कुछ मिनट बाद घायल तकनीशियन अंदर लाए गए।

एक ने कठिनाई से कहा—

"वे बाहर से नहीं आए..."

"वे पहले से स्टेशन के भीतर थे।"

अदिति समझ गईं।

यह केवल मिसाइल हमला नहीं था।

यह अंदर से कब्ज़ा करने का अभियान था।

पुराना परिचित

कुछ देर बाद एक व्यक्ति हथियारबंद दल के साथ नियंत्रण क्षेत्र में पहुँचा।

अदिति ने उसे पहचान लिया।

कबीर मलिक।

वह कभी भारतीय रणनीतिक प्रणालियों का वरिष्ठ अभियंता था।

वज्र-9 की मूल संरचना उसी ने विकसित की थी।

लेकिन आठ वर्ष पहले वह सेवा से गायब हो गया था।

कबीर ने कहा—

"मेजर राव।"

"आप अभी भी आदेशों पर विश्वास करती हैं।"

अदिति ने उत्तर दिया—

"और तुम अभी भी प्रणालियों पर।"

कबीर हल्का-सा मुस्कुराया।

"प्रणाली मनुष्य से अधिक विश्वसनीय होती है।"

"आज तुम उसी प्रणाली के विरुद्ध खड़ी हो।"

अदिति ने स्क्रीन की ओर देखा।

"तुम्हें क्या चाहिए?"

"वज्र-9 का नियंत्रण।"

"क्यों?"

"क्योंकि अगले तीस मिनट में भारत की रक्षा प्रणाली बदलने वाली है।"

अदिति ने प्रक्षेप-पथ फिर देखा।

उन्हें अचानक कुछ असामान्य दिखाई दिया।

उन्होंने डेटा बड़ा किया।

"ये परमाणु हथियार नहीं हैं।"

कबीर चुप रहा।

"इनका लक्ष्य जनसंख्या केंद्र भी नहीं है।"

अदिति ने आगे कहा—

"ये संचार और ऊर्जा केंद्रों को निशाना बना रहे हैं।"

कबीर की आँखों में पहली बार हल्का परिवर्तन आया।

अदिति समझ चुकी थीं।

"तुम भारत को नष्ट नहीं करना चाहते।"

"तुम उसे कुछ घंटों के लिए अंधा करना चाहते हो।"

कबीर ने उत्तर दिया—

"अराजकता कुछ घंटों की होगी।"

"नियंत्रण वर्षों का।"

अदिति ने समझ लिया।

यह विदेशी आक्रमण नहीं था।

यह तकनीकी तख्तापलट था।

इंटरसेप्शन

अब केवल उन्नीस मिनट बचे थे।

वज्र-9 की अधिकांश स्वचालित प्रणालियाँ निष्क्रिय थीं।

मैनुअल नियंत्रण ही बचा था।

अदिति ने हथियार अधिकारी से पूछा—

"इंटरसेप्टर कितने?"

"चार।"

"लक्ष्य?"

"आठ।"

अदिति ने स्क्रीन देखी।

आठ आने वाली वस्तुएँ एक-दूसरे से लगातार संपर्क कर रही थीं।

एक का मार्ग बदलते ही बाकी भी अपने मार्ग बदलती थीं।

अदिति ने कहा—

"ये मिसाइलों का समूह नहीं है।"

"यह एक उड़ता हुआ नेटवर्क है।"

कबीर ने उनकी ओर देखा।

अदिति ने आठों वस्तुओं की संरचना का विश्लेषण किया।

एक वस्तु बाकी सात से लगातार अधिक डेटा का आदान-प्रदान कर रही थी।

"वही केंद्रीय नोड है।"

हथियार अधिकारी ने पूछा—

"यदि उसे नष्ट कर दें?"

"तो बाकी आठ अलग-अलग लक्ष्य बन जाएँगे।"

कबीर चिल्लाया—

"तुम्हारे पास केवल एक अवसर है!"

अदिति ने उत्तर दिया—

"इसीलिए उसे सही जगह इस्तेमाल करेंगे।"

पहला इंटरसेप्टर छोड़ा गया।

लक्ष्य ने दिशा बदली।

इंटरसेप्टर पीछे मुड़ा।

दूसरा चरण।

तीन सेकंड।

दो।

एक।

टक्कर।

केंद्रीय ड्रोन नष्ट हो गया।

स्क्रीन पर बाकी सात प्रक्षेप-पथ अचानक बिखर गए।

अब वे एक-दूसरे से समन्वित नहीं थे।

अदिति ने तुरंत शेष तीन इंटरसेप्टरों को अलग-अलग लक्ष्यों पर निर्देशित किया।

पहला।

दूसरा।

तीसरा।

तीनों ने लक्ष्य नष्ट कर दिए।

अब चार शेष वस्तुएँ थीं।

लेकिन वे स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ रही थीं।

वज्र-9 ने भारतीय मुख्यभूमि की अन्य रक्षा प्रणालियों को नए निर्देश भेजे।

कुछ ही मिनटों में चारों भी नष्ट कर दी गईं।

कमरे में पहली बार शांति लौटी।

लेकिन कबीर अभी वहीं था।

उसने मुख्य रणनीतिक नेटवर्क को बंद करने की कोशिश की।

अदिति ने उसे रोक लिया।

संघर्ष छोटा था।

कबीर प्रशिक्षित था।

लेकिन अदिति जानती थीं कि उसे हराना लक्ष्य नहीं था।

उसे जीवित पकड़ना आवश्यक था।

क्योंकि उसके पास उस पूरे षड्यंत्र की जानकारी थी।

कबीर को गिरफ्तार कर लिया गया।

उसके बाद उसके डिजिटल अभिलेखों से पता चला कि उच्च स्तर के कुछ अधिकारियों ने मिलकर पूरे अभियान की योजना बनाई थी।

मूल आदेश—

"वज्र-9 को निष्क्रिय करो"

उसी योजना का हिस्सा था।

वज्र-9 — आधिकारिक अभिलेख

03:06 UTC

खतरा: निष्प्रभावी
नागरिक क्षति: शून्य
रक्षा प्रणाली: पुनर्स्थापित
आंतरिक घुसपैठ: प्रमाणित
षड्यंत्र: जाँचाधीन

रिपोर्ट के अंत में अदिति ने स्वयं एक पंक्ति लिखी।

"सबसे कठिन लक्ष्य वह नहीं जिसे रडार पकड़ न सके।

सबसे कठिन लक्ष्य वह निर्णय है जिसे कोई व्यक्ति यह मानकर ले कि उसे कभी चुनौती नहीं दी जाएगी।"

उन्होंने हस्ताक्षर किए।

फिर हथियार नियंत्रण बंद कर दिया।

समुद्र के ऊपर सूर्योदय हो रहा था।

वज्र-9 अब भी खड़ा था।

लेकिन उस रात उसने केवल एक हमले को नहीं रोका था।

उसने यह भी सिद्ध किया था कि रक्षा का अर्थ केवल सीमा की रक्षा करना नहीं—सही निर्णय लेने की स्वतंत्रता की रक्षा करना भी है।



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