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Ranjana Mathur

Drama

4  

Ranjana Mathur

Drama

अग्नि

अग्नि

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"मम्मा बड़ी ज़ोरों की भूख लगी है। कुछ खाने को दीजिए न।"

"अच्छा बेटा। अभी कुछ पका कर लाती हूँ। बता क्या खाएगी ?"

माँ ने चिंकी से बड़े लाड़ से पूछा।

माँ

अन्न कच्चा नहीं खा सकते क्या ? खाना पकाकर क्यों खाते हैं ?

और ये आग किसने बनाई ?

"बहुत बढ़िया प्रश्न किया ।" मम्मा बोलीं।

बेटी लाखों वर्ष पूर्व पाषाण युग में  हमारे पूर्वज आदिमानव भूख लगने पर वनों से कच्चे कंद मूल फल वनस्पति फूल पत्तियों को खाकर पेट भरा करता था। शनैः-शनैः जनसंख्या बढ़ी और वह जानवरों को भी मार कर कच्चा ही खाने लगा।

पहले मानव जंगलों में रहा करता था और उसके पास किसी प्रकार के कोई संसाधन नहीं थे जो उसके जीवन को आरामदायक बना सके। ऐसे में आदिमानव ने खुद अपनी जरूरतों के अनुसार नयी नयी खोजें की।

जब मानव बड़े-बड़े पत्थरों को इधर से उधर ले जाते थे तब कई बार पत्थरों के आपस में घर्षण से उनमें चिंगारी व प्रकाश देखा। पहले तो वे इसको देख भयभीत हुए फिर वे इसका उपयोग अपनी रहने वाली गुफाओं के द्वार पर जंगली जानवरों से रक्षा हेतु पत्थर रगड़ कर आग उत्पन्न करके करने लगे।

दो वस्तुओं के परस्पर घर्षण से विद्युत व अग्नि उत्पन्न होना वास्तव में एक वैज्ञानिक तथ्य है।

कई बार जब वे किसी जानवर को मार कर लाते या वनस्पति को लाकर पत्थरों पर रखते और उनको खिसकाने पर आग पैदा हो जाती तो वह भोजन आग में सिक जाता

उस अनजाने में सिके भोजन में उन्हें कच्चे सामान के बजाय अधिक स्वाद लगा और धीरे-धीरे वे पत्थरों से अग्नि उत्पन्न करके भोजन पका कर खाने लगे।

इस प्रकार अग्नि की उत्पत्ति हुई और हुई भोजन के पकाने की प्रक्रिया की शुरुआत भी।

हर युग अपने साथ अनेक महान आविष्कार लेकर आया और उन्हीं महान आविष्कारों में से एक अग्न का आविष्कार है। अग्नि की खोज कितनी महत्वपूर्ण थी, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज खाने को पकाकर खाना इसी आग के कारण संभव हो पाया है।

"जी मम्मा।"

"मुझे अब समझ में आ गया कि हमारे दिन प्रति दिन के अनेकों कार्यों को शीघ्रता से करने और हमारे जीवन को आसान बनाने में इस अग्नि बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण है और यह एक लम्बी यात्रा का परिणाम है।"

"लेकिन अब तो पेट में चूहे कूद रहे हैं। पुलाव कब तक बनेगा ?"

"पुलाव हाज़िर है बेटू। " कहते हुए मम्मा चिंकी ने टेबल पर प्लेट सजा दी। इन बातों के बीच मम्मा पुलाव तैयार कर चुकी थीं।

" अरे वाह !" चिंकी चहकी।

" बेटा देख लो अग्नि का चमत्कार।" मम्मा बोली।


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