आरज़ू....आगे की कहानी....
आरज़ू....आगे की कहानी....
आरज़ू....कहानी आगे की.....
रागिनी टूट गई थी क्योंकि वो चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पा रही थी । रागिनी ने अपनी सहेलियों तक को यह नहीं बताया कि अंदर से वो विक्रम को कितना चाहती है। चाहती क्या है पूजा करती है ।
विक्रम को याद करते हुए शायद ही कभी रागिनी के मन में गन्दी भावनाएं आई हो। वो तो विक्रम को किसी मंदिर के देवता की तरह पूजती थी ।दिन में एक बार किसी बहाने दर्शन कर लेने की अभिलाषा रखने वाली रागिनी का प्यार किसी स्वच्छ जल की तरह पवित्र था ।
रागिनी शांत रहने लगी । मन में ठान लिया कि वो अब विक्रम के बारे में नहीं सोचेगी ।........
अगले कुछ दिन आते जाते भी कभी नज़र नहीं आया। बस विक्रम जब ऊँची आवाज़ में गाने चलाता था तो रागिनी सुनकर परेशान हो जाती थी। विक्रम हमेशा उदासी वाले गाने ही लगाने लगा । रागिनी को अपनी चिंता तो नहीं थी पर विक्रम की खूब चिंता करती । पर सामने आने पर उससे नज़रें मिला लेने की हिम्मत भी नहीं कर पाती ।
होली का दिन था सब खुश थे ।चारो ओर उत्साह था ।रंगों की बौछार थी। उस दिन विक्रम और रागिनी की मम्मी का सामना एक दूसरे से हुआ । हाथ में गुलाल लिए विक्रम ने हैप्पी होली कहते हुए रागिनी की मम्मी को गुलाल लगाया और पैर छू कर प्रणाम किया ।
रागिनी किचन में थी अपनी बहनों के साथ । न जाने कब विक्रम आया और हैप्पी होली झांसी की रानी बोल कर नज़रें दूसरी तरफ़ घूमा ली। रागिनी के सब्र का बाँध टूट गया था । उसने एक मग में रंग और पानी डाला और पूरा मग विक्रम पे उड़ेल दिया ।विक्रम गीला हो चुका था ।रागिनी की ओर उसी मग में गुलाल डाला और पानी डालकर भागा । रागिनी को समझ नहीं आया कि कहाँ भागे तो वह विक्रम के घर का दरवाजा खुला देखकर अंदर भागी ।.........
बाकी कहानी अगले अंक में

