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Pawan Kr Sinha

Romance

4  

Pawan Kr Sinha

Romance

!! आखरी दिन !!

!! आखरी दिन !!

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सभी दोस्त पवन का इंतजार कर रहे थे, वक़्त सुबह के दस बजे के आसपास का था, कॉलेज का आखिरी दिन होने के वजह से विदाई समारोह का आयोजन हुआ था, कुछ देर में सभी इकट्ठे हो गए हॉल में, फ़िर पवन भी आ गया, किसी की नज़र में नहीं आया पर उनका एक दोस्त अमन उसने देखा कि पवन के चेहरे में अलग सी बेरुख़ी थी वो पूरी तरह से हताश था। इस तरहा उनका चेहरा लटका हुआ था कि जैसे ज़िंदगी का ही आखिरी दिन हो। अमन ने उनके कंधे पर हाथ रखकर कहा कि "भाई हम सब दोस्त हमेशा तेरे साथ रहेंगे" पवन ने सिर्फ सुना कुछ कहा नहीं।

सभी लोग आ चुके थे और कार्यक्रम भी शुरू हो गया था, पर पवन का मुंह दाईं ओर ही मुड़ा हुआ था जहाँ लड़कियाँ बैठी थीं। वो मुस्कान को देख रहा था और मुस्कान उन्हें देख रहीं थी, दोनों एक दूसरे की आँखों में देख कर बस यही सोच रहे थे कि क्या प्यार यही होता है ? तीन साल पहले मिले दोस्त बने फ़िर प्यार हुआ फ़िर एक दूसरे की ज़िंदगी बने और जैसे ही तीन साल ख़त्म हुए तो एक दूजे को अलविदा कह कर चल पड़ो अपने अपने रस्ते ! कुछ घंटे ऐसे ही बीत गए और कार्यक्रम ख़त्म हुआ फ़िर सब एक दूसरे से मिलने लगे, कहीं दोस्ती के आँसू टपक रहे थे, कहीं भविष्य की चर्चा चल रहीं थी, और यहाँ पवन और मुस्कान एक दूसरे के नजदीक आए मुस्कान ने थोड़ी समझदारी दिखाई अपने चेहरे के पीछे का दर्द छुपाए रखा। वो हँस कर बातें करने लगी पर पवन ग़मगीन था मुंह से ज्यादा कुछ लफ्ज़ निकल ही नहीं रहे थे उनके, मुस्कान ने अपने जज़्बात संभाले रखें, पवन बस उन्हें देखे जा रहा था और इस तरहा से उनके चेहरे को देख रहा था कि जैसे दिमाग़ में उनकी तस्वीर बना रहा हो, पलकें भी नहीं झपक रही थी उनकी, कुछ वक़्त बस यूँ ही देखते रहे एक दूसरे को।

अब तो मुस्कान मायूस हो चुकी थी फ़िर धीरे धीरे दोनों की आँख से इक दर्द की लहर निकल पड़ी, और बाहर से आवाज़ आयी कि हॉल खाली करो अब। सब दरवाजे की और चले बाहर निकलने को, पवन और मुस्कान फ़िर एक दूसरे को देखते रहे, उस वक़्त उनकी धड़कने तेज़ रफ्तार से भाग रहीं थी की जैसे कुछ छूट रहा हो, दोनों हताशा की सीमा पार कर चुके थे । अपनी जगह से हिल भी नहीं रहे थे और हॉल बस खाली ही हो रहा था, दोनों की आँख से आँसू ओ की धार बह रहीं थीं ।तभी पवन का दोस्त अमन आया और उसने मुस्कान की एक दोस्त को इशारा किया की मुस्कान को ले जाए यहाँ से, अमन को डर था कि किसी को पता न चले और हंगामा न हो, मुस्कान की दोस्त ने मुस्कान हाथ पकड़ कर खींचा पर वो हिली नहीं तो उसने कहा "चलो अब यहाँ से" पर मुस्कान ने कुछ जवाब न दिया । बस खड़ी थी और पवन को देख रहीं थी, फ़िर अमन ने पवन को कहा "भाई चल अब यहाँ से" उसने ये कहकर कंधे पर हाथ रखा पर उसने भी कुछ जवाब न दिया। अमन ने उनका हाथ पकड़ा और उनके सामने देखा तो वो पवन अब था ही नहीं, बेजान जिस्म था, अमन के पैरों से ज़मीन खिसक गई। मुस्कान की दोस्त देख रहीं थी, उन्हें कुछ समझ ही नहीं आ रहा था ! कि ये हो क्या रहा है, उसने मुस्कान को हिलाया तो वो गिर पड़ी।यहाँ पवन गिरा पर उसको अमन ने पकड़ लिया, पर कुछ था नहीं उनके अंदर अब, पवन की आत्मा और मुस्कान की आत्मा तो कब की हॉल के बाहर निकल गई थी और अपनी दुनिया बसाने एक दूजे का हाथ पकड़ के जा रहीं थी !

हुआ यूँ कि ज्यादा दर्द और एक दूसरे के बिना रहने के डर की वजह से दोनों को छोटा सा हार्ट अटैक आया और वहीं धड़कने रुक गईं, अमन को डर था की इनके प्यार के बारे में किसी को पता न चले और हंगामा न हो, पर यहाँ तो कुछ और ही हो गया।


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