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Rani Gujrati

Abstract

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Rani Gujrati

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यही है रास्ता और मैं आज़ाद

यही है रास्ता और मैं आज़ाद

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यहाॅं एक सफ़र बाहर का है

और एक सफ़र मेरे मन का है।

मेरा ये मन चल पड़ा पहाड़ों की ओर है

जो किसी मरहम की तरह है,

आहिस्ता सा है।

जब हमराह किसी और मोड़ चलने लगे 

तब से हमदर्द पाहड़ ही बनने लगे ।


वो बादलों से गले लगाते है

हवाओं से हमें बुलाते है

घुुुमने के लिए नहीं, गुुुुमाने के लिए

अपने दर्द, परेशानी को छोड़,

भुलाने के लिए ।


ये वादियाॅं और मैं, पास में

सुुुुकून की तरह बहती नदियाॅं

खास वो शाम के नज़ारे,

शहरों में कहाॅं ऐसे,

जुगुनू से चमकते तारे,

और वो खुला आसमान, वो ठंडी रात

यही है रास्ता और मैं आज़ाद।


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