STORYMIRROR

Yogesh Kumar

Classics

3  

Yogesh Kumar

Classics

यह ध्वज तेरी पहचान हैं

यह ध्वज तेरी पहचान हैं

1 min
275

गूंज रहे थे नारे उन गोलियों के शोर में

जान रख हाथ पर मौत खड़ी थी चौखट पर

आज नहीं झुकने दूंगा तिरंगा उठा था नारा

चाहे खून में रंग जाऊंगा


आज नहीं झुकूंगा में

चाहे लड़ते लड़ते मर जाऊंगा

खा तू इस मिट्टी की कसम

इस मिट्टी के कण कण में बस जाएगा तू


आज मिला हैं अवसर

श्री राम से भिड़कर,

भारत मां को समर्पित हो जाएगा तू

गोलियां आज मेरा शरीर क्यों न भेद दे

सीने में भारत मां का वास रहेगा

भारत के लिए लड़ा हूं में

स्वतंत्रता सेनानी मेरा नाम रहेगा


ध्वज आज तुझे भी पुकार रहा

आज नहीं उठा तू, तो जुख जाएगा वो

लेहराएग वो नहीं, अंदर से मर जाएगा तू

उठेगा आज तू तेरा इम्तिहान

देश के लिए लड़ेगा तू यह ध्वज तेरी पहचान हैं


तिरंगे से रंग दे तू भारत

यह भारत मां की मांग हैं

याद रखना जहन में

आज अगर तू झुक गया

तो गुलाम बन जाएगा


आज अगर तो थम गया तो

तु इतिहास बन जाएगा

आज अगर तू लड़ गया

तो आज़ाद ये हिन्द हो जाएगा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics