यादो की बारीश
यादो की बारीश
रिमझिम सावन आया ..
साथ यादो का कारवा लाया
याद आया वो पहिली बारीश में
तेरे साथ भिगना, घूमना ..
याद आये वो गीत
जो हमने सुने साथ साथ..
याद आया गीत सुनते सुनते
तुम्हांरा गुनगुनाना..
चाय पकोडी फर्माइश करना
याद आये वो लम्हें जो
हमें गुजारे साथ साथ,
सपनों में रंग भरे साथ साथ..
कुछ बात थी ऐसी
जो कई सारे शिकवो के बाद भी
जुड़े थे हम जैसे पंतग संग डोरी
होती थी तकरार हमेशा से
पर बात न करो तुम तो
सास रुक जाती मेरी
तुम्हे मनाना भी एक
परिक्षा थी जैसे मेरी
तुम्हांरा हसता चेहारा देखना
बस यही ख्वाईश रहती मेरी..
मंजूर न था शायद खुदा को
हमारा साथ साथ रूठना मनाना..
एक तुफान ऐसा आया
जो बहा ले गया सारा..
बिखरे रंग,बिखरे सपने
समेटू क्या क्या अब..
जो खुद ही बिखर गई।
