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Hardik Mahajan Hardik

Abstract

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Hardik Mahajan Hardik

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याद आ रहा

याद आ रहा

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वक्त-वक्त का बीत गया

समय वहीं का वहीं रहा

कर्मठताओं के साथ ही 

एक समय नि:शब्द रहा


कोरोना काल का दिन

बेखबर था बीत गया 

साल खतम हो गया 

फिर से काल आ गया 


तबाही मंज़र दिखा

रहा समय स्तिथि के 

बखूबी निभा रहा है 

बिन सोचे समझे 


निरंतर दर बदर 

बेकार पल याद

आ रहा कब खत्म

होगा ये काल पूछ रहा।


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