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Hardik Mahajan Hardik

Abstract

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Hardik Mahajan Hardik

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वक़्त को बन्धन में बाँधा

वक़्त को बन्धन में बाँधा

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बंधे हुए वक्त को बन्धन में बांधा क्यूँ।

वक्त ही पता देख जताता खुद से क्यूँ।


मौका दस्तूर बिन चाहत में उसके क्यूँ।

सम्भालें नहीं सम्भलता वह जाने क्यूँ।


अनजान ख़ामोश दरिया ऐ-समंदर क्यूँ।

ऐ-साहिल तू हर बार उतर जाता है क्यूँ।


आदत से मजबूर इनकार होता है क्यूँ।

देख दरिया भी समंदर में तैरता है क्यूँ।


काबिल उसके लगता सबकुछ है क्यूँ।

सहमा जो सब बेबाक़ सा हुआ है क्यूँ।


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