STORYMIRROR

Satish Chandra Pandey

Inspirational

3  

Satish Chandra Pandey

Inspirational

वो गिर पड़ा अचानक

वो गिर पड़ा अचानक

1 min
231

दर्द आम जन का

समझो तो तब मनुज हो

आवाज बन सको तो

सचमुच में तब मनुज हो।

भूखा गली में सोया

पूछा नहीं किसी ने

बच्चा भी उसका रोया

पूछा नहीं किसी ने।

वो गिर पड़ा अचानक

पैरों में दम नहीं था,

लोगों ने समझा कोई

दारू पिया हुआ है।

पैसे का बल दिखा कर

शोषण किया था उसका

सब देख कर भी हमने

यह मुँह सिया हुआ है।

मतलब ही क्या है हमको

लूटे किसी को कोई,

यह सोच कर ही हमने

यह मुँह सिया हुआ है।

वो रो रही थी पथ में

हमने न पूछा कुछ भी

हम चल दिए फटाफट 

यह मुँह सिया हुआ है।

ठंडा उसे लगा था,

चिपका हुआ था माँ से

हमने किया न कुछ भी

यह मुँह सिया हुआ है।

ऐसे में कैसे बोलें 

हम दर्द जानते हैं,

इंसान-जानवर में

हम फर्क जानते हैं।

सचमुच में यदि मनुज हैं

मुँह खोलना ही होगा,

दर्द में मनुज के 

कुछ बोलना ही होगा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational