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Sudhirkumarpannalal Pratibha

Abstract Inspirational Thriller

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Sudhirkumarpannalal Pratibha

Abstract Inspirational Thriller

वो आंगन

वो आंगन

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मां

के

आंगन

में

पापा

थे

भाई

था

बहन

थी


वो

खाट

वो

चूल्हा

वो

गाड़ा

वो

मिट्टी

का

चूल्हा


ढेका 

ओखल

मूसल

निगस्ता

रेगनी

था

उस

आंगन

में

हंसी

थी


खुशी

थी

समर्पण

था

आपसी

रिश्तों

की

मिठास

थी

अच्छा

लगता

था

बहुत

हीं

अच्छा

लगता

था


आज

घर

है

लेकिन

आंगन

नहीं

है

मां

नहीं

है

समर्पण

नहीं

है।


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