STORYMIRROR

Vivek Agarwal

Inspirational

4  

Vivek Agarwal

Inspirational

वीरों का कैसा हो वसन्त

वीरों का कैसा हो वसन्त

1 min
504


वीरों का कैसा हो वसन्त।

अदम्य वीरता साहस अनंत।


मातृभूमि के ऋण को चुकाने।

गौण और सब रिश्ते पुराने।

जीवन शौर्य शिखर पहुँचाने।

गौरवशाली है इनका अंत।

वीरों का कैसा हो वसन्त।


राष्ट्र पर जब संकट आये।

रिपु-सैन्य मेघ बन छाये।

माँ भारती पुत्रों को बुलाये।

सेवा प्रस्तुत तत्पर तुरंत।

वीरों का कैसा हो वसन्त।


अरिदल का बन सम्पूर्ण काल।

सीमा पर सज्जित अटल ढाल। 

कब देखी ऋतुओं की चाल।

हो सावन शिशिर अथवा हेमंत।

वीरों का कैसा हो वसन्त।


यौवन का आनंद उठाते।

जब हम गीत प्रणय के गाते।

वसंत छटा देख सुख पाते।

राष्ट्र धर्म निभाते ये सुमंत।

वीरों का कैसा हो वसन्त।


यह कविता सुभद्रा कुमारी चौहान जी की कविता "वीरों का कैसा हो वसन्त" से प्रेरित है और मेरी ओर से उन्हें और देश के सैनिकों को एक श्रद्धांजलि देने का छोटा सा प्रयास है। 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational