STORYMIRROR

Manoj Sharma

Abstract

4  

Manoj Sharma

Abstract

विदाई

विदाई

1 min
245

जाते हो तो जाते जाते

काम मेरा एक कर के जाओ


थोड़ी यादें थोड़े कागज़

चाय का प्याला रख के जाओ


दे नहीं सकता मोल मैं इसका

फ़िर भी ज़रा सा हँस के जाओ


याद ना करना भूल ही जाना

हाँ इतना वादा कर के जाओ


किस का कितना दामन गीला

इस बात पे मुझसे लड़ के जाओ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract