वाकिए
वाकिए
वाकिये तो अनगिनत है जिंदगी के,
समझ नहीं आता कि किताब लिखू या हिसाब लिखूँ !
अजीबो गरीब लोग हैं जिंदगी में
समझ नही आता उनका किस्सा पहले या सफलता के बाद लिखूं।
बहुत से लोग ऐसे जो मुझे देखना पसंद नहीं करते
समझ नही आता की उनको मैं मेरी मंजिल मिलने से पहले या बाद दिखूं।
लोग बहुत भला बुरा कहते हैं
समझ नहीं आता की उनको पलट कर जवाब दूं या उनके लिए दिल साफ रखूं।
