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Kavita Pant

Inspirational

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उठो रणवीर

उठो रणवीर

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रणभूमि के वीर

गाओ नवल मधुर जय गीत,

जय घोष सुनाओ बार-बार

रचो नवल रण-नीत ।


उठ जाओ, और शीघ्र करो प्रण

शत्रु का वध करने का,

ओजस्वी भालों पर अपने

तुम लिख डालो ख़ुद की जीत।


शत्रु उन्मादी हाथी सा

हथियारों से सज़ा हुआ ,

आकुल-व्याकुल ललकार रहा

मत होना तुम भयभीत।


तुम किसी तपस्वी से बढ़कर

निज सुखों का देते हो बलिदान .

तुम मर कर अमर हुआ करते

तुम ही तो कहलाते शहीद


मेरा उर रह-रह द्रवित हुआ

कुछ कहने को प्रेरित हुआ ,

तुम ही तो शक्ति हमारी हो

तुमसे हम सबकी सच्ची प्रीत।


पावन रक्त बहाकर

तुमने दी स्वतंत्रता की बहार,

कितनी कुंठाएँ ध्वस्त हुईं

तब गूँज उठा मृदु राष्ट्रगीत।


स्वतंत्रता की रक्षा हेतु

बार-बार तुम्हें लड़ना है,

गरिमामय भारत सुख हित

इतिहास नया रच दो युग-मीत।



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