उत्कर्ष तक
उत्कर्ष तक
जीवन में जीवन के उत्कर्ष तक जाना है।
अंधियारे मनों में प्रभात का सूर्य जलाना है।
साथ कोई ना.....दे।
अकेले राह बनाना है।
कंटक पर चल के प्रगति का सुमन खिलाना है।
नापी है धरती।
नापा है आसमां।
क्षितिज को छू कर आना है।
जीवन में जीवन के उत्कर्ष तक जाना है।
