STORYMIRROR

Preeti Sharma "ASEEM"

Inspirational

4  

Preeti Sharma "ASEEM"

Inspirational

उत्कर्ष तक

उत्कर्ष तक

1 min
316

जीवन में जीवन के उत्कर्ष तक जाना है।

अंधियारे मनों में प्रभात का सूर्य जलाना है।

 साथ कोई ना.....दे।

अकेले राह बनाना है।


कंटक पर चल के प्रगति का सुमन खिलाना है।

नापी है धरती।

 नापा है आसमां।


 क्षितिज को छू कर आना है।

जीवन में जीवन के उत्कर्ष तक जाना है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational