STORYMIRROR

Abha Soni

Abstract Action

3  

Abha Soni

Abstract Action

उलझन

उलझन

1 min
430

जब चलने का सोचा तो डर गया

कही ये कदम गलत ना हो जाए

यही सोच‌‌ मैं थम गया ।


क्या मैं कामयाब हो भी पाऊंगा?

क्या मैं जीत जाऊंगा?

क्या मैं कुछ कर भी पाऊंगा?

जो चाहता हूं वो बन भी पाऊंगा?


यही सोच मैं थम गया

खून रगो का जम गया

फैसला लेने की घड़ी देख 

मेरा दम गया।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract