STORYMIRROR

Hardik Mahajan Hardik

Abstract

4  

Hardik Mahajan Hardik

Abstract

उड़ान

उड़ान

1 min
453

उड़ान भरने निकल पड़ा हूँ,

अपनी मंज़िल ढूंढ लिया हूँ।


साथ तेरा हमेशा मैं रहता हूँ,

कलम तेरे साथ चलाता हूँ।


प्रखर कलम यह ज़िंदगी हूँ,

इस दुनिया में मैं तो हमेशा हूँ।


हार्दिक रुके ऐसा तो नहीं हूँ,

मैं ज़िन्दगी में साथ हमेशा हूँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract