STORYMIRROR

Shubhra Ojha

Abstract

3  

Shubhra Ojha

Abstract

उड़ान

उड़ान

1 min
12K

सपनों की उड़ान जरूरी है

कुछ बनने के लिए,

जब अपनी मंज़िल की तरफ़

पहला कदम बढ़ाओ तो

ये ना सोचो कि तुम क्या हो

कि तुम क्या कर पाओगे,

तुम जहांँ हो जैसे हो

बस उसी अवस्था में चल पड़ो,

तुम पैदल चल रहे हो, या

साईकिल से

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता,

कोई कभी नहीं देखेगा

तुम्हारी शुरुआत

सभी देखेंगे तुम्हे जब

तुम पहुंँच जाओगे 

अपनी मंज़िल के पास,

तो तुम साधो अपना लक्ष्य

और चलते रहो लगातार

रुकना तुम बिल्कुल नहीं

जब तक तुम छू ना लो 

अपना आसमान।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract