तू
तू
झांक ख़ुद में और सोच जरा,
क्यों क़दम रुकाए खड़ा हैं तू ?
क्या हो रहा हैं क्यों हो रहा हैं,
क्यों इन बातों में उलझा हैं तू ?
दुनिया में क्या हो रहा हैं तेरे संग क्या होगा,
क्यों व्यर्थ की चिंता में डूबा हैं तू ?
ग़र है जुनून तेरे हौसलों में,
तो उठ, कदम बढ़ा अब मंजिल को पा ले तू...
जो होने वाला हैं वो तक़दीर हैं,
बदल दे तक़दीर अगर बदल सकता है तू...
सबकी चिंता दूर कर सुकून के लम्हे दे दे तू,
अब अपने दम पर नया दौर ला दे तू...
झांक ख़ुद में और सोच जरा,
क्या क्या कर सकता है तू....
