STORYMIRROR

VIVEK ROUSHAN

Abstract

2  

VIVEK ROUSHAN

Abstract

तुम्हारे अन्दर जिन्दा होगा

तुम्हारे अन्दर जिन्दा होगा

1 min
121

छोड़ गए जो लोग उन्हें याद करने से क्या फायदा होगा 

जिन्दा तो रहोगे पर जिन्दगी  में गम  जियादा होगा।


कातिल होकर भी जो ज़माने की नज़रों में अच्छा लगे 

समझ लेना उसके चेहरे पर शराफत का लिबादा होगा। 


दाने  देकर  जो  परिंदो  को  अपने  पास बुलाते हैं 

इसमें दाने देने वाले का कुछ न कुछ तो इस्तिफ़ादा होगा।


जो लोग एक क़तरा  को भी दरिया  समझ बैठते हैं 

उन  सबों  के  अन्दर कुछ  प्यास भी जियादा होगा।


उस शख्स को टूट कर चाहना फिर खुद टूट जाना 

इसका मतलब  वो  शख्स तुम्हारे अन्दर जिन्दा होगा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract