STORYMIRROR

Sandeep Gupta

Abstract

3  

Sandeep Gupta

Abstract

तुम

तुम

1 min
258

तुम्हें सिर्फ चाँद कैसे कहे,

तुम तो सारा आसमां हो,

धड़कते हो मेरा वजूद बन,

तुम तो मेरा सारा जहां हो..


मोहब्बत है तुमसे,

मुझसे जुदा तुम कहाँ हो,

रब की तरह मेरे हर तरफ,

जहाँ देखूँ मैं तुम वहाँ हो..


हो झिलमिलाते सितारे मेरे खुशियों के,

सूरज से रौशन उम्मीदों की किरण हो,

इंद्रधनुष से सुनहरे रंग लिए,

तुम जीवन के वर्णन हो...


तुम्हें सिर्फ चाँद कैसे कहे,

तुम तो ख़ुद में पूर्ण हो,

चाँद की तरह घटते बढ़ते कहाँ,

पूर्णिमा बन जीवन में सम्पूर्ण हो...



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract