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Bapan Das

Romance Fantasy

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Bapan Das

Romance Fantasy

तुम

तुम

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तुम चंदन का मानो वृक्ष हो,

मैं उससे लिपटा नाग कोई!

मैं कांपता तार सितार सा हूँ,

तुम उससे झरती राग कोई!


तुम चंचल नैना मृग सी हो,

मैं कल-कल बहता नीर कोई!

मैं तपता सूरज अंगार सा हूँ,

तुम अल्हड़ घटा की चाल कोई!


तुम मनमोहक, सुध, सुखदायी सी,

मैं तुमसे जुड़ने की चाह कोई!

मैं गर्म सेहरे की रात सा हूँ,

तुम चाँदनी की शीतल परछाईं कोई!


तुम दीप शिखा की लौ सी हो,

मैं घिरता हुआ तमस कोई!

मैं बुझने को आतुर दीपक,

तुम बनकर आशा की किरण कोई!


तुम आकाश की अनंतता हो,

मैं पंछी का ठिकाना कोई!

मैं बंधन में उलझी साँस हूँ,

तुम मुक्ति का संदेश कोई!


तुम सृष्टि की अनकही गूँज हो,

मैं मौन का संगीत कोई!

मैं अपूर्ण, बिखरा शब्द हूँ,

तुम कविता की परिपूर्ण पंक्ति कोई!



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