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Saleem Shaikh

Romance

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Saleem Shaikh

Romance

तुम याद आगये

तुम याद आगये

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मैं जाम उठा रहा था कि तुम याद आ गये

तुम को भुला रहा था कि तुम याद आ गये,

एक दोस्त जब अपनी महबूबा का ख़त लिए

मुझ को सुना रहा था कि तुम याद आ गये,

कल रात चाँद अपनी घटाओं की ओट से

जलवा दिखा रहा था कि तुम याद आ गये,

था किस का इंतज़ार कि अटका हुआ था दम

मैं सोच ही रहा था कि तुम याद आ गये,

अल्लाह जाने क्या मेरे सजदों का हश्र हो

सर को झुका रहा था कि तुम याद आ गये।



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