तुम याद आगये
तुम याद आगये
मैं जाम उठा रहा था कि तुम याद आ गये
तुम को भुला रहा था कि तुम याद आ गये,
एक दोस्त जब अपनी महबूबा का ख़त लिए
मुझ को सुना रहा था कि तुम याद आ गये,
कल रात चाँद अपनी घटाओं की ओट से
जलवा दिखा रहा था कि तुम याद आ गये,
था किस का इंतज़ार कि अटका हुआ था दम
मैं सोच ही रहा था कि तुम याद आ गये,
अल्लाह जाने क्या मेरे सजदों का हश्र हो
सर को झुका रहा था कि तुम याद आ गये।

