STORYMIRROR

अच्युतं केशवं

Abstract

3  

अच्युतं केशवं

Abstract

तुम मधुर पुस्तक प्रेमगीत की

तुम मधुर पुस्तक प्रेमगीत की

1 min
362

तुम मधुर पुस्तक

प्रेमगीत की

बेसुरा मैं

किंतु गाता रहा। 


तुम रुचिर पुस्तक

प्रेम कविताओं की

अनपढ़ा मैं

किंतु पढ़ता रहा। 


तुम मदिर पुस्तक

प्यार की गज़ल की

बेअदब मैं

किंतु कहता रहा। 

-

तुम प्यार की किताब

पढ़कर तुम्हें

बेसुरे को सुर मिले

अनपढ़ा पढ़ गया

बेअदब अदीब हुआ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract