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Kawaljeet Gill

Abstract Inspirational


4.0  

Kawaljeet Gill

Abstract Inspirational


तुम क्या ......

तुम क्या ......

1 min 283 1 min 283

तुम क्या समझोगे दर्द हमारा

तुम्हें तो खुश रहने की आदत है,

तुम क्या समझोगे हमारी तनहाइयां

तुम्हें तो महफ़िलों में रहने की आदत है,

तुम क्या समझोगे फूलो के टूटने की कहानी,

तुम्हें तो भंवरों की तरह उड़ने की आदत है,

तुम क्या समझोगे बाती की जलन की कहानी,

तुम तो चुप चाप दीये की तरह देखते रहोगे,

तुम क्या समझोगे राधा का दर्द ओ कान्हा,

तुम्हें तो गोपियों संग रास रचाने की आदत है ।


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