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bablu kumar

Romance

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bablu kumar

Romance

तुम जान हो मेरी...

तुम जान हो मेरी...

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तुम जान हो मेरी,

हाँ तुम पहचान हो मेरी।

सच कहता हूँ तुमसे

मेरे दिल की तुम अरमान

हो मेरी

तुम जान हो मेरी...


कभी जो दूर जाना पड़े

बिन तेरे क्या कर ही

जाऊँगा मैं,

तुमसे दूर होकर तो

मर ही जाऊँगा मैं।

मेरे होठों की तुम मीठी

मुस्कान हो मेरी,

हाँ तुम जान हो मेरी।


हर कदम पर साथ चलने

वाली शान हो मेरी,

हाँ तुम जान हो मेरी।

तुम्हारे बिना रह भी तो नहीं

सकता मैं,

सामने तेरे कुछ कह भी तो

नहीं सकता मैं ।

इतना सताती हो, क्या कोई

शैतान हो मेरी,

फिर भी तुम जान हो मेरी।।


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