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DR.AVINASH CHANDRA

Abstract

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DR.AVINASH CHANDRA

Abstract

ठग कौन?

ठग कौन?

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सुरक्षित था जीवन

आरक्षित था मन

केंद्रित था पतन

और ठगा जा रहा था वतन

हम भी ठगे जा रहे थे

ठग रहे थे

सो रहे थे

जग रहे थे!


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