STORYMIRROR

DR.AVINASH CHANDRA

Abstract

2  

DR.AVINASH CHANDRA

Abstract

ठग कौन?

ठग कौन?

1 min
54

सुरक्षित था जीवन

आरक्षित था मन

केंद्रित था पतन

और ठगा जा रहा था वतन

हम भी ठगे जा रहे थे

ठग रहे थे

सो रहे थे

जग रहे थे!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract