Click Here. Romance Combo up for Grabs to Read while it Rains!
Click Here. Romance Combo up for Grabs to Read while it Rains!

Bilal Ali Khan

Abstract


3  

Bilal Ali Khan

Abstract


टेबल

टेबल

1 min 42 1 min 42

एक टेबल ऐसी हो जिस पर कंप्यूटर न हों...

तारो के गुच्छो में उलझी, प्रिंटर के बोझ में दबी न हों...

एक टेबल ऐसी हो जिस पर कोई बोझ न हों...

दिन भर के काम और रात के खाने के बाद जब आप उससे लगी कुर्सी पर बैठें...

तब बस आप हों और अपने आप से बात हो...

एक टेबल ऐसी हो जिस पर कोई बोझ न हो...

अब क़लम रखें या रखें किताब ये आपकी मर्ज़ी....

किताब पढ़ेगें संवर जायगें...

क़लम चलाएंगे, निखर आएंगे....

एक टेबल ऐसी हो जिस पर कोई बोझ न हों...

वहाँ सिर्फ़ आप हो और आपके ख़्यालात हों...

चाहें तो इज़हार कर दें,

या फिर........

गहरी सांस.........

एक टेबल ऐसी हो जिस ओर कोई बोझ न हो..........


Rate this content
Log in

More hindi poem from Bilal Ali Khan

Similar hindi poem from Abstract