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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Abstract Inspirational

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Abstract Inspirational

तपस्या

तपस्या

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तपस्या वो नहीं है

जो निर्जन वन में 

घने उपवन में 

सुनसान कंदराओं में 

पहाड़ों की गिराओं में 

दुनिया से बहुत दूर 

एकांत हो जरूर 

प्रकृति मां की गोद में 

फक्कड़ मन की मौज में 

जो की जाती है। 

लोगों की नजर में 

वही तपस्या कहलाती है। 

मगर मैं तो उसे 

तपस्या मानता हूं 

जो समाज में रहकर 

परिवार का पेट भरकर 

हाड़ तोड़ मेहनत कर 

सब नियमों का पालन कर 

रिश्ते-नातों का सम्मान कर 

सारी मुसीबतों से लड़कर 

वक्त की आंच में तपकर

सर्दी गर्मी बरसात सहकर 

दुखों से लड़ाई लड़कर 

गमों का जहर पीकर 

अपनों के घावों से 

तिल तिल कर मरकर 

धोखाधड़ी, विश्वासघात 

बेईमानी से बचकर 

विपरीत परिस्थितियों से लड़कर 

तिल तिल आगे बढ़ना ही 

तपस्या कहलाती है । 

यह सबसे कठिन तपस्या है 

इसे गृहस्थ धर्म कहते हैं । 

चलो , आज से हम 

पूरी शिद्दत से इसे शुरू करते हैं । 



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