तोड़ दो बन्धन
तोड़ दो बन्धन
तोड़ दो बन्धन
खोल दो हथकड़ी
निकल जाओ बाहर
खुली है खिड़की
न रोको मन की उड़ान को
खुद चुन लो राह गगन की
कभी तो सुन लो अपने दिल की
ख्वाहिशें तमाम हैं दबी
कुछ बोझ हटाओ
कुछ खुद को मनाओ
सामने सपनों की दुनिया खड़ी।
तोड़ दो बन्धनखोल दो हथकड़ी
निकल जाओ बाहर
खुली है खिड़की।
