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Richa Goswami

Romance

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Richa Goswami

Romance

तन्हा दिल

तन्हा दिल

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एक अजीब सी उथल-पुथल बेचैनी सी छाई है

भरी महफिल है लोगों का मेला है


फिर भी मेरा दिल तन्हा अकेला है

दुनिया के लिए खुश हूं अंदर कुछ जकड़ा है


कुछ दिन ही थे खुशियों के

अब गम ने फिर से आ पकड़ा है।


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