STORYMIRROR

Kavita Sharrma

Inspirational

4  

Kavita Sharrma

Inspirational

स्वीकार भाव

स्वीकार भाव

1 min
212

मिला जो भी है उसे कबूल कीजिए

मीन मेख फ़िज़ूल में न निकालिए।


कमियां दूसरों में ढूंढनी हैं आसान बहुत

कभी अपनी कमियां भी तो गिनाइए।


एक उंगली गर उठी है किसी और की तरफ़

तीन इशारा कर देती हैं खुद की भी तरफ़।


जो जैसा है उसे वैसा ही स्वीकारें मन से

यही उसूल है सिखाया हमें कुदरत ने।


এই বিষয়বস্তু রেট
প্রবেশ করুন

Similar hindi poem from Inspirational