सूर्य किरण
सूर्य किरण
तेरा आना उत्कर्ष सा है
चिर धूँध,पत्तों को स्पर्श कर
धरती पे आ घासों पे फैल जाना
ओस की बूँदों से गुफ़्तगू कर
उससे लिपट ख़ुद में समेट लेना
ऋतु परिवर्तन का संकेत कर
वसंत ऋतु को साथ लाना
मोतियों में रंग भर कर
उसको स्वर्ण नग बना जाना
ये सब तेरा ही तो आभास है
बसंत संग लाने का प्रयास है
अपनी सुनहरी किरणों से
सब जीव में ऊर्जा भर
ठंड मिटाने का ही तो प्रयास है
ये बसंत के आने का आभास है
ये बसंत के आने का आभास है।
