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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Abstract

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

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सुंदरता और बुद्धिमत्ता

सुंदरता और बुद्धिमत्ता

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सुंदरता भगवान का दिया हुआ वरदान है 

जो खास लोगों को ही मिलता है 

कभी कभी सुंदरता टुकड़ों में मिलती है 

जैसे किसी की आंखें खूबसूरत होती हैं 

किसी की नाक तो किसी के गाल 

किसी के होंठ सुंदर तो किसी के बाल 

किसी को फिगर की नैमत बख्शी

तो किसी की है मतवाली चाल 

संपूर्ण सुंदरता की रानी पद्मिनी हैं मिसाल । 

भगवान बुद्धि भी सबको नहीं देते 

हर कोई बीरबल या तेनालीराम नहीं होते 

पर ये जरूरी नहीं कि जो सुंदर है 

वह बुद्धिहीन ही है । 

सुंदरता और बुद्धि यद्यपि रेयर कांबिनेशन है 

मगर द्रोपदी, सुभद्रा, ऐश्वर्या इसके उदाहरण हैं । 

सुंदरता तन की ही नहीं मन की भी होती है 

जिनका तन गोरा होता है मन काला होता है उनका 

तन चाहे काला हो मगर मन सुंदर होना चाहिए 

मन की सुंदरता ही असली सुंदरता है 

सुंदर तन अहंकार को जन्म देता है 

और सुंदर मन में इंसानियत बसती है 

सुंदरता और बुद्धिमत्ता 

मानव कल्याण के लिए हो तो ठीक है 

वरना तो इन दोनों ने विनाश ही किया है।


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