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Prerana Parasnis

Abstract

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Prerana Parasnis

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सुकून

सुकून

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भटकता रहा जिसकी तलाश में दरबदर 

उसको कही भी न मैंने पाया


ढूंढ रहा था दिल जिस सुकून को 

माँ तेरी गोद में समा कर ही आया।   


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