सपनों का शहर~ मुंबई
सपनों का शहर~ मुंबई
घर से दूर, अकेले यूं
पर यहाँ आना ज़रूरी था।
पास रह कर भी दूर थे
तो दूरीयां जताना भी ज़रूरी था।
थी इतने दिन आराम की नींद
पर थकान की नींद से रूबरू होना भी ज़रूरी था।
पहली नौकरी, सैलाब यूं
पर उमड़ना ज़रूरी था।
मुश्किल राह है, प्रकाश-वचिंत
पर हिम्मत जुटाना ज़रूरी था।
रूह में बसा है यादों का पिटारा
पर और नये बनाना भी तो ज़रूरी था।
