STORYMIRROR

Divya Jaiswal

Abstract

3  

Divya Jaiswal

Abstract

सपने

सपने

1 min
306

अक्सर सोचा करती हूँ मैं कि

इन्सान क्यों देखा करता है सपने ?

और अगले ही पल पाती हूँ जवाब

कि ये ही तो होते हैं जो हैं उसके अपने


जिनमें वो उस हर ख्वाहिश को

हासिल कर लेता है जो यूं मुमकिन नहीं पाना 

कभी कभी ये सपने हकीकत मे भी तब्दील हो

जाते हैं और जिंदगी की हर शिकन दूर कर जाते हैं


इसलिए जिन्दगी की अहम जरूरत हैं ये सपने

जिन्दगी जीने के लिए बहुत जरूरी हैं ये सपने।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Divya Jaiswal

Similar hindi poem from Abstract