STORYMIRROR

Mitali Mishra

Abstract Inspirational

3  

Mitali Mishra

Abstract Inspirational

सफर

सफर

1 min
201

गिरना, उठना, उठ कर फिर से गिरना

गिर कर फिर संभालना, संभल कर फिर

एक बार चलने की कोशिश करना

यही तो जिंदगी के कदम है।

अक्सर जिंदगी के सफर में 

हम लड़खड़ा जाते है

पर वक्त ऐसा भी आ जाता है

जब लड़खड़ाते कदम वक्त के साथ

मजबूत हो जाते है।

माना की मुश्किलें बहुत आती है

जिंदगी के हर मोड़ पे

माना की उलझनें भी

बहुत आती है जिंदगी के मोड़ पे

घबरा सा जाता है ये दिल

सहम जाता है ये मन

पर हौसला अगर हो बुलंद

तो हर जंग में जीत तय है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Mitali Mishra

हौसला

हौसला

1 min पढ़ें

एहसास

एहसास

1 min पढ़ें

बंधन

बंधन

1 min पढ़ें

बारिश

बारिश

1 min पढ़ें

सफर

सफर

1 min पढ़ें

सागर

सागर

1 min पढ़ें

घर

घर

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Abstract