स्मरण
स्मरण
यादों के तराने तेरी याद में आज भी गूंजते हैं
सुबह से श्याम तेरी बातों के तराने गूंजते हैं,,
कुछ खट्टी कुछ मीठी यादों को पिरोते हैं,,
जुगनुओं कि तरह मद्धम-मद्धम तेरी बातों को सुनते हैं,,
धीमें-धीमें ज़िन्दगी को तेरी याद में गुनगुनाते हैं,,
करवट बदल बदल कर रात तेरी याद में बिताते हैं,,
दया करुणा और निधि का संघर्ष तेरी याद में करना हैं,,
शब्द वहीं तेरी याद में स्मरण कहलाते हैं,,
बंदिशें वहां जहाँ हम तुम साथ थे
तप्तिशे वहां जहां हम तुम बिछड़ गये थे,
बैचेनी फिर स्मरण करती तेरी याद में
धड़कन फिर धक-धक करती तेरी याद में
तन्हा हर सितम तेरी याद में
हाथों से छूटे हाथ तेरी याद में
रोज़-रोज़ के किस्से जो खत्म हुये तेरी याद में
बेफ़िक्र हुआ में आज फिर तेरी याद में
आंसुओं के मोती जो बिखर रहें तेरी याद में
तेरा रूठना मेरा मनाना मेरा रूठना तेरा मनाना याद में
कब तक ख़्वाब तेरे देखूं मेरी याद में
कब तक तेरे ख़्वाब पिरोऊँ मेरी याद में
ज़िन्दगी का ये कैसा खेल हैं
नहीं समझ आता हैं
कब तक यह चलेगा तेरी मेरी याद में।
