Adil Ahmad
Romance
उन्हें मालूम था मोहब्बत का हर एक सलीक़ा
पहली थी मोहब्बत समझ नहीं आया यह सलीक़ा।
हर कुछ सीखने का तजुर्बा था आपको
हमें भी सिखाया, यह मोहब्बत का सलीक़ा।
ज़िन्दगी
हर दिल अज़ीज़
सलीक़ा ए मोहब्...
क्या मिला मुझ...
इस बात का तुझे इल्म नहीं मैं कोरा कागज़ नहीं और तू मेरी कलम नहीं। इस बात का तुझे इल्म नहीं मैं कोरा कागज़ नहीं और तू मेरी कलम नहीं।
दिल में है जो वो लिखूं, या लब पे है जो वो लिखूं। दिल में है जो वो लिखूं, या लब पे है जो वो लिखूं।
हर जन्म मेरी राशि रहे तू और तुझे जान से भी ज्यादा चाहूँगा। हर जन्म मेरी राशि रहे तू और तुझे जान से भी ज्यादा चाहूँगा।
मंदिर की आरती संग बतियाते मेरे गले में हार डालकर खुद को मुझे सौंपना सातवाँ फेरा मंदिर की आरती संग बतियाते मेरे गले में हार डालकर खुद को मुझे सौंपना सातव...
इस वादे को पूरा करने की कोशिश ज़रूर करेगी तुम्हारी रिया। इस वादे को पूरा करने की कोशिश ज़रूर करेगी तुम्हारी रिया।
तू ही मुझे हर बार मिले जन्म न भी लूँ। तू ही मुझे हर बार मिले जन्म न भी लूँ।
अब जाकर पता चला तू ही मेरी हेलमेट तू ही मेरी सोलमेट थी। अब जाकर पता चला तू ही मेरी हेलमेट तू ही मेरी सोलमेट थी।
तुम अपना घर ठीक से ढूंढना कुछ वहीं छूट गया मेरा तुम अपना घर ठीक से ढूंढना कुछ वहीं छूट गया मेरा
शायद उस धुन में कुछ अलग बात थी जिसको याद करके मचलती रही मैं शायद उस धुन में कुछ अलग बात थी जिसको याद करके मचलती रही मैं
तरीक़े कई है कहने के पर कहने के लिए थोड़े ही कहना है, हमें तो तेरी बाहों में रहना है जुल्फ़ों क... तरीक़े कई है कहने के पर कहने के लिए थोड़े ही कहना है, हमें तो तेरी बाहों में...
हाँ नायाब ही तो हूँ मैं हाँ नायाब ही तो हूँ मैं
टूट रही थी मैं भी ऐसे, जैसे छूटा कोई अपना था। टूट रही थी मैं भी ऐसे, जैसे छूटा कोई अपना था।
तुम और तुम्हारी यादें...क़ैद ही रहना चाहती हैं मेरे दिल के किसी अंधेरे कोने में। तुम और तुम्हारी यादें...क़ैद ही रहना चाहती हैं मेरे दिल के किसी अंधेरे कोने ...
क्या फायदा इन सब पुरानी यादों को यूँ समेटना आखिर वो तुम जो नहीं हो। क्या फायदा इन सब पुरानी यादों को यूँ समेटना आखिर वो तुम जो नहीं हो।
मैं तुम्हारा काजल हूं, काजल ही रहूंगा ऐसे ही तुझे हरेक बुरी नजर से बचाता रहूंगा। मैं तुम्हारा काजल हूं, काजल ही रहूंगा ऐसे ही तुझे हरेक बुरी नजर से बचाता रहूं...
तेरी याद में लिखती मेरी कलम आज भी है ! तेरी याद में लिखती मेरी कलम आज भी है !
अपनी माँ का बेटा हूं उसी में विलीन होता हूं। अपनी माँ का बेटा हूं उसी में विलीन होता हूं।
खुशियों के उपवन में, घुल जाएगी जन्नत, फिर खामोशी में ना पछताओगे। खुशियों के उपवन में, घुल जाएगी जन्नत, फिर खामोशी में ना पछताओगे।
बस इतना पता है दिल को ये जान लो अब तुम भी जैसे मैं हूँ एक हत्या तुम साज़िश हो मेरी बस इतना पता है दिल को ये जान लो अब तुम भी जैसे मैं हूँ एक हत्या तुम साज़िश हो ...