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Rekha Shukla

Romance

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Rekha Shukla

Romance

शर्मिला आशिक

शर्मिला आशिक

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680


आज फिर जीने की तमन्ना है

दिल को मिली रज़ा खुला आसमान है

वो चाहत है करिश्मा ये कुदरत का है

हंसी आंखों में, खिलखिलाट नज़ारा है

हाथों मे तेरे मेरा हाथ है साथ रंग है

जन्नतें हुस्न नज़ारा और कहां पाना है



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