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Hardik Mahajan Hardik

Abstract

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Hardik Mahajan Hardik

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शिकवे शिकायतों के

शिकवे शिकायतों के

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हैरानी थोड़ी सी हमें भी तो हो रही हैं,

कुछ इस बात की परेशानी हो रही हैं।


क्या करें जिंदगी की ये हलचल तेज़ हैं,

कुछ तो वाकिफ़ जिंदगी मुनासिफ़ हैं।


शिकवे शिकायतों के चारों घिरे हुए हैं,

जहाँ जाए वहीं सब देखों अड़े हुए हैं।


कुछ तो हकीकत रूबरू उनसे हुई हैं,

जिंदगी की यह दास्ताँ बड़ी अजीब हैं।


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