शिक्षकों के धन्यवादी
शिक्षकों के धन्यवादी
कोरा काग़ज़ की तरह हम सब ही,
इंसानियत मानवता के पुजारी हैं।
सुनहरे शब्द शिक्षा के पढ़ा रहे वो
उन सभी शिक्षकों के धन्यवादी हैं।
उन शिक्षकों से विनम्र निवेदन करे,
जो स्वार्थ के लिए सदा ही पढ़ाते हैं।
यदि ज्ञान देने वाले शिक्षक न होते,
हम भी बिल्कुल सही बेजान होते।
लड़ते झगड़ते जानवरों के जैसे ही,
सभी ठोकरें जहाँ की खा रहे होते।
सारा दिन खाना-पीना और सोना,
जानवरों से बदत्तर जीवन है होता।
