STORYMIRROR

Manju Saini

Inspirational

4  

Manju Saini

Inspirational

शीर्षक: आहट कंगन की

शीर्षक: आहट कंगन की

1 min
219

कौन कहता है कि तेरी आहट नहीं है

तू नहीं साथ तो क्या मेरे कंगन की आहट तो है

कौन कहता है गहरी काली रात में अकेलापन दुखद

तू नहीं साथ तो क्या मेरे कंगन की खनखनाहट तो है

कंगन मेरा मेरे जीने की आस ही तो है


कौन कहता है कि मेहँदी रंग लाती हैं

तू नहीं तो मेरे कंगन मेहँदी को सजाते है

कौन कहता है सपने देखना है तो अंधेरा भी हो

अंधेरा ज़रूरी नहीं खुली आँखों से तेरा दीदार होता है

कंगन मेरा मेरे जीने की आस ही तो है


कौन खत हैं कि पा लिया तुमने मुझको

सुनो ना ! जीतना चाहते हो तो पा लो मुझे मुझसे

अपनेपन का घूँट कई बार जीतने का संकेत देता है

तभी प्रीत में जीत की मिठास दुगुनी होती हैं

कंगन मेरा मेरे जीने की आस ही तो है


कौन कहता है कि स्याह रातें डराती हैं

तेरी आहट तो पल पल साथ मेरे चलती हैं

मैं कहाँ अकेली हूँ रातों में कभी

तेरी आहट मेरे साथ साथ चलती हैं

कंगन मेरा मेरे जीने की आस ही तो है



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational