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Praveen Gola

Abstract

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Praveen Gola

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शब्द खो गए

शब्द खो गए

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शब्द खो गए

तुम्हारे बिन

मैं मूंद पलकें

रही उन्हे गिन


शब्द खो गए

तुम्हारे बिन


तुमने मिलना छोड़ा

शब्दों ने नाता तोड़ा

मैं खोजती रही

उन्हे रात -दिन


शब्द खो गए

तुम्हारे बिन


तुमने लिखना सिखाया

अंदर सब जगाया

एक बार फिर मिलो

जायें ना ये पल छिन


शब्द खो गए

तुम्हारे बिन


कितनी रातों में

जले ये दिये

अब जल रहे 

कहीं टिम - टिम


शब्द खो गए

तुम्हारे बिन


बस एक बार

तुम आ जाओ

इन शब्दों को

मैं लूँ फिर गिन

शब्द खो गए

तुम्हारे बिन।


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