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Chandramani Manika

Abstract

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Chandramani Manika

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सच

सच

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सच की दीवारों पर

झूठे ताले क्यूँ पड़ जाते है।


झूठे पैबंदों के नीचे

सच्चे क्यूँ गड़ जाते हैं।


पहन मुखोटा सच्चाई का

झूठी रीत चलते हो।


आदर्श तुम्हारे ख़ुद के ही,

तहखाने में सड़ जाते है।


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