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Suresh Kulkarni

Classics

4  

Suresh Kulkarni

Classics

सौभाग्य है मेरा

सौभाग्य है मेरा

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मैं राह में पडा था

कंकर ईक छोटासा था 

आते जाते मुझे 

लोग ठुकराते थे कई


सौभाग्य है मेंरा की

आपने उठा लियाऔर

तराशके पेश किया 

दुनिया के सामने 


आज आभुषणोंकी 

शान हूॅं मैं

फिर भी सीधा साधा

ईन्सान हूॅं मै 


मैं राह में पडा था

पत्थर ईक बडासा था

आते जाते मुझे 

लोग ठुकराते थे कई


सौभाग्य है मेंरा की 

आपने उठाया और

तराशके पेश किया 

दुनिया के सामने 


आज मंदिर की मूरत

ईक पहचान हूॅं मैं

फिर भी सीधा साधासा 

एक ईन्सान हूॅं मै


मैं पेडपे लटका था 

फल खट्टासा पडा था

पंछीभी कभी नहीं छूते थे


सौभाग्य है मेंरा की 

आपका स्पर्श हुआ और 

आज सबसे मीठा 

मीठा फल हूॅं मैं


सबके मन की ख्वाईश हूँ मैं 

फिर भी सीधा साधा

एक इन्सान हूँ मैं।


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