STORYMIRROR

Sudhir Srivastava

Abstract

4  

Sudhir Srivastava

Abstract

सायली छंद-माचिस

सायली छंद-माचिस

1 min
359

माचिस

चूल्हा जलाए

घर भी जलाए

करें कैसे

उपयोग

खुद

जल जाऊँगी

तुम्हारे काम आऊँगी

यही स्वभाव

मेरा

तीली

मात्र एक

परिदृश्य बदल देती

सावधान रहिए

विचारिये।

माचिस

न रहे

चूल्हा नहीं जलेगा

नहीं पकेगा

भोजन

औकात

मत देखो

आप सब मेरा

सोच लीजिए

पछताओगे।

सिर्फ़

एक तीली

औकात बता देती

हर कोई

नतमस्तक

माचिस

सिखाती हमें

एकता का महत्व

बँटकर हुए

अस्तित्वहीन

मुझे

भड़काओ मत,

अस्तित्व विहीन होगे

मेरे साथ

तुम


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract