सावन
सावन
मन चंचल सा हो जाता है, सावन तेरे आ जाने पे
सबकुछ शिवमय हो जाता है सावन तेरे आ जाने पे
देखो नन्ही सुकुमार कली, पुलकित हो बाट निहार रही
अब बरसोगे तब बरसोगे, ब्याकुल हो तुझे पुकार रही
कण कण मुकुलित हो जाता है, सावन तेरे आ जाने पे
सबकुछ शिवमय हो जाता है , सावन तेरे आ जाने पे
मदमस्त कावड़िया झूम रहा, शिव धुन के अगणित गीतों पर
सारा जग शिव को रिझा रहा , अपने अपने शिव गीतों पर
धरती पे स्वर्ग उतर आता, सावन तेरे आ जाने पे
सबकुछ शिवमय है हो जाता, सावन तेरे आ जाने पे
कोई व्रत करता प्रिय पाने को, कोई चाहे रहे सुहाग अमर
जन्मों से हो प्यासे जैसे, भटकें वन बाग तड़ाग भ्रमर
मधुकर को मधु है मिल जाता, सा...वन तेरे आ जाने पे
सबकुछ शिवमय है हो जाता, सा...वन तेरे आ जाने पे।
